Summary
3 in 1 उम्मीदों का आश्रम मानवता और सेवा का संकल्प
हमारा ट्रस्ट समाज के सबसे ज़रूरतमंद लोगों के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी उद्देश्य से हम आश्रम निर्माण हेतु Hero Fund एकत्र करना चाहते हैं। यह आश्रम तीन महत्वपूर्ण भागों में विकसित किया जाएगा। पहले भाग में बुज़ुर्ग माता-पिता और वृद्धजनों के लिए शांत, सुरक्षित और सम्मानपूर्ण आवास होगा। दूसरे भाग में रेलवे प्लेटफॉर्म और सड़कों पर भटक रहे बेसहारा लोगों को आश्रय, भोजन और पुनर्वास मिलेगा। तीसरे भाग में AI Coaching Center स्थापित किया जाएगा, जहाँ युवाओं को आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
इस संपूर्ण परियोजना को साकार करने के लिए भूमि विकास, निर्माण और सुविधाओं सहित अनुमानित 7 से 8 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।
👉 आपका छोटा-सा सहयोग किसी की पूरी ज़िंदगी बदल सकता है।
आज आप जो दान करेंगे, वही किसी बुज़ुर्ग के लिए सहारा, किसी बेसहारा के लिए घर और किसी युवा के लिए भविष्य बनेगा।
हमारी वेबसाइट पर दान के लिए तीन सरल विकल्प उपलब्ध हैं:
1️⃣ Normal Donation – आप अपनी इच्छा अनुसार ₹10, ₹20, ₹50, ₹200, ₹2000 या किसी भी राशि का दान कर सकते हैं।
2️⃣ Sponsorship Program – यहाँ आप ₹200 से शुरू होकर अपनी क्षमता अनुसार सहयोग कर सकते हैं।
प्रत्येक ₹200 के दान पर एक Unique ID Generate होकर दानकर्ता को प्रदान की जाएगी।
इन्हीं Unique ID के माध्यम से चयन प्रक्रिया द्वारा:
मुस्लिम भाइयों को 16 दिन का उमराह पैकेज,
और हिंदू भाइयों को 11 से 15 दिन की उत्तराखंड चारधाम यात्रा का अवसर प्रदान किया जाएगा।
👉 यह स्पष्ट किया जाता है कि ट्रस्ट यात्रा से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं का सीधे संचालन नहीं करता है। यह सुविधा धार्मिक सहयोग योजना के अंतर्गत, न्यूनतम 11 से 51 चयनित दानकर्ताओं को सामूहिक रूप से प्रदान की जाएगी।
3️⃣ Dedicated Donation Button – जो लोग इस मिशन को बड़े स्तर पर सहयोग देना चाहते हैं, उनके लिए विशेष विकल्प।
🤲 यह केवल दान नहीं, मानवता के साथ खड़े होने का संकल्प है।
आज आप जो सहयोग करेंगे, वही कल किसी की दुआ बनकर आपके नाम से जुड़ जाएगा। आइए, मिलकर ऐसा आश्रम बनाएं जो धर्म, जाति और
भेदभाव से ऊपर उठकर इंसानियत की सेवा करे।
“ख़्वाहिशों की दौड़ में ज़िंदगी कट ही रही है,
आइए इस ज़माने में आख़िरत के लिए भी कुछ बना लें — क्या पता यह आख़िरी ही हो।”
ख़्वाहिशें बहकाती रही हैं हर दौर में
बना लो आख़िरत, ज़माना आख़िरी है
- Raised: ₹0
- Goal: ₹80,000,000